उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश का चुनावी गणित बदल दिया है। 2022 के विधानसभा चुनाव के समय प्रदेश में जहां 82 लाख 66 हजार 644 मतदाता दर्ज थे, वहीं एसआईआर के बाद जारी 2026 की अंतिम सूची में यह संख्या घटकर 71 लाख 58 हजार 949 रह गई है। यानी दोनों सूचियों के बीच 11 लाख 7 हजार 695 मतदाताओं का अंतर सामने आया है। हालांकि इस अंतर को सीधे एसआईआर में काटे गए नामों की संख्या मानना उचित नहीं होगा, क्योंकि दोनों सूचियों के बीच सत्यापन, नाम जोड़ने और हटाने समेत कई प्रक्रियाएं हुई हैं।
विधानसभा स्तर पर देखें तो एसआईआर का असर लगभग पूरे प्रदेश में दिखाई दे रहा है। 70 में से 69 विधानसभा क्षेत्रों में 2022 के मुकाबले मतदाताओं की संख्या कम हुई है। केवल हरिद्वार की ज्वालापुर सीट ऐसी है, जहां 2022 की तुलना में 73 मतदाता बढ़े हैं। सबसे बड़ी कमी देहरादून की धर्मपुर विधानसभा सीट पर दर्ज हुई है। यहां 57 हजार 318 मतदाता कम हुए हैं। इसके बाद देहरादून कैंट, ऋषिकेश, रायपुर और राजपुर रोड जैसी सीटों पर भी बड़ी गिरावट सामने आई है। देहरादून जिले की सभी 10 विधानसभा सीटों पर मतदाता संख्या में कमी दर्ज हुई है। चकराता में 2,066, विकासनगर में 7,714, सहसपुर में 12,608, धर्मपुर में 57,318, रायपुर में 39,989, राजपुर रोड में 39,046, कैंट में 46,346, मसूरी में 34,113, डोईवाला में 20,240 और ऋषिकेश में 43,299 मतदाता कम हुए हैं। इससे साफ है कि राजधानी जिले की कई शहरी सीटों पर मतदाता सूची में बड़ा बदलाव हुआ है। मैदानी जिलों की कई सीटों पर भी तस्वीर बदली है। काशीपुर विधानसभा क्षेत्र में 41,281, हरिद्वार में 39,553, रुड़की में 31,989, रानीपुर में 32,129, हल्द्वानी में 31,294 और बाजपुर में 23,017 मतदाताओं की कमी दर्ज हुई है। ऊधम सिंह नगर की बात करें तो किच्छा में 21,236, रुद्रपुर में 19,552, जसपुर में 17,566, खटीमा में 12,919, नानकमत्ता में 12,857, गदरपुर में 8,848 और सितारगंज में 5,200 मतदाता कम हुए हैं। पहाड़ी विधानसभा क्षेत्रों में भी मतदाता सूची में उल्लेखनीय बदलाव हुआ है। टिहरी में 18,329, लैंसडाउन में 19,937, चौबट्टाखाल में 16,933, पौड़ी में 16,118, श्रीनगर में 14,367, द्वाराहाट में 14,016, सल्ट में 14,396, नरेंद्रनगर में 12,998 और बदरीनाथ में 13,240 मतदाता कम हुए हैं। उत्तरकाशी की गंगोत्री सीट पर 11,320, पुरोला में 983 और यमुनोत्री में 2,583 मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है। चमोली में बदरीनाथ में 13,240, थराली में 8,394 और कर्णप्रयाग में 11,643 मतदाता घटे हैं, जबकि रुद्रप्रयाग में यह कमी 9,337 रही। एसआईआर के बाद बदली मतदाता सूची राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हो गई है। खासतौर पर धर्मपुर, कैंट, ऋषिकेश, रायपुर, राजपुर रोड, काशीपुर, हरिद्वार और रुड़की जैसी सीटों पर 30 हजार से अधिक मतदाताओं का अंतर सामने आया है। ऐसे में दलों को 2022 के बूथवार मतदान आंकड़ों को नई मतदाता सूची के साथ मिलाकर अपनी रणनीति तैयार करनी होगी। हालांकि मतदाताओं की संख्या में कमी को सीधे किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में जोड़ना जल्दबाजी होगी। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता अमरेंद्र बिष्ट ने आरोप लगाया कि भाजपा ने निर्वाचन आयोग की मदद से चुनाव में गड़बड़ी की कोशिश की है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस आगामी चुनाव में सरकार बनाएगी। वहीं भाजपा मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा कि मतदाता सूची में हुआ बदलाव निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिए जरूरी था। उनके मुताबिक फर्जी नाम, दूसरी जगह स्थानांतरित हो चुके लोगों और मृत व्यक्तियों के नाम हटाए गए हैं। एसआईआर के बाद तैयार हुई यह नई मतदाता सूची अब 2027 विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दलों के सामने नया डेटा सेट है। आने वाले समय में इसी आधार पर बूथवार समीकरण, मतदाता संपर्क और चुनावी रणनीति को नए सिरे से तैयार किया जाना तय माना जा रहा है।

